रूस ने पीएम मोदी को दिया अपने देश का सर्वोच्चच नागरिक सम्मान

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस का सर्वोच्चच नागरिक सम्मान दिया जाएगा। इस बात की घोषणा रूसी दूतावास ने की है। इस सम्मान का नाम 'सेंट एंड्रयू द एपोस्टल ऑर्डर'(St Andrew The Apostle Order) है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इसको मंजूरी दे दी है।

पीएम मोदी को ये सम्मान रूस और भारत के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए दिया जाएगा। ये रूस का सबसे बड़ा सम्मान है। सेंट एंड्रयू द एपोस्टल सम्मान काम करने वाले रूसी नागरिक और देश-विदेश के प्रमुख नेताओं को दिया जाता है।

पीएम मोदी को पिछले महीने यूएई ने अपने देश का सबसे बड़ा सम्मान जायेद मेडल' से नवाजा था। यूएई की ओर से यह सम्मान किसी भी देश के प्रमुख, राजा या फिर राष्ट्रपति को दिया जाता है। पीएम मोदी से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्रिटेन की महारान क्वीन एलिजाबेथ और पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को यह अवार्ड दिया जा चुका है।

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घर खरीदारों की पहली पसंद, दूसरी मुंबई : रिपोर्ट

Gurugram : देश का आईटी हब बेंगलुरू घर खरीदारों के बीच निवेश के लिए पहली पसंद है, उसके बाद मुंबई का नंबर है। ट्रेक2मीडिया रिसर्च की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

'बेस्ट प्रैक्टिस रिपोर्ट 2019' के मुताबिक, घर खरीदरों द्वारा अन्य शहरों की तुलना में बेंगलुरू को अधिक महत्व देने का प्रमुख कारण शहर का महानगरीय चरित्र, आईटी और आईटी-संचालित सेवाओं में रोजगार का मौका और समय पर घर की डिलिवरी है।

रिपोर्ट में कहा गया है, "बेंगलुरू को भारतीय खरीदारों के निवेशक की पहली पसंद के रूप में चुना है। निवेश के लिए शीर्ष 10 शहरों में से चार शहर दक्षिण भारत के हैं।"

अन्य दक्षिण भारतीय शहरों में हैदराबाद तीसरे नंबर पर, चेन्नई सातवें नंबर पर और कोयंबटूर 10वें नंबर पर है।
उपभोक्ता पसंद सूचकांक में मुंबई दूसरे नंबर पर है, जबकि गुरुग्राम चौथे नंबर पर है। शीर्ष 10 शहरों में पुणे पांचवें नंबर पर, कोलकाता छठे नंबर पर, अहमदाबाद आठवें नंबर पर और चंडीगढ़ नौंवे नंबर पर है।

कंपनियों में, बेंगलुरू की कंपनी शोभा लि. सबसे अच्छी कंपनी है, जिसके बाद गोदरेज प्रॉपर्टीज दूसरे नंबर पर और एंबेसी समूह तीसरे नंबर पर है।

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Flats will be cheaper, Govt removes GST

Gurgaon : The government on Saturday said that buyers of real estate properties will not have to pay Goods and Services Tax (GST) if they purchase the fully constructed property after the issue of completion certificate.

"It is brought to the notice of buyers of constructed property that there is no GST on sale of complex/building and ready-to-move-in flats where sale takes place after issue of completion certificate by the competent authority," the Ministry of Finance said in a statement.The GST is applicable on sale of under construction property or ready-to-move-in flats where completion certificate has not been issued at the time of sale, it said.

The Ministry further said that housing projects in the affordable segment such as Jawaharlal Nehru National Urban Renewal Mission, Rajiv Awas Yojana, Pradhan Mantri Awas Yojana or any other housing scheme of state governments will attract GST of eight per cent. "For such projects, after offsetting input tax credit, the builder or developer in most cases will not be required to pay GST in cash as the builder would have enough ITC in his account books to pay the output GST," the statement said.

For projects other than affordable segment, the government said it is expected that the cost of the complex/buildings/flats would not have gone up due to implementation of GST. "Builders are also required to pass on the benefits of lower tax burden to the buyers of property by way of reduced prices/instalments, where effective tax rate has been down," it said.

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DLF को नई परियोजना

Gurugram : डीएलएफ साइबर सिटी डेवलपर्स लिमिटेड (डीसीसीडीएल) को गुरुग्राम में तैयार हो रही एक नई वाणिज्यिक परियोजना से सालाना करीब 350 करोड़ रुपए की आय का अनुमान है। सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। परियोजना अगले साल मार्च तक तैयार होगी। डीएलएफ साइबर सिटी डेवलपर्स लिमिटेड, डीएलएएफ और जीआईसी का संयुक्त उपक्रम है। सूत्रों ने कहा कि साइबर पार्क नामक इस परियोजना के 25 लाख वर्ग फीट में से 18 लाख वर्ग फीट का लीज पहले ही बैंक ऑफ अमेरिका, गार्टनर और वीवर्क जैसे बड़े ग्राहकों को दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि बचे क्षेत्र को भी अगले कुछ महीने में लीज पर दे दिया जाएगा।

बारह एकड़ की इस हरित वाणिज्यिक परियोजना को करीब 1,500 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। इससे सालाना किराया आय 350 करोड़ रुपए के आसपास रहने की उम्मीद है। परियोजना के तीन टावरों में वर्तमान में 120 रुपए प्रति वर्गफुट मासिक का किराया चल रहा है। डीएलएफ ने 2016 में इस परियोजना के निर्माण का ठेका एल एण्ड टी को दिया था। डीएलएफ के प्रवक्ता ने हालांकि, इस बारे में कुछ भी कहने से मना कर दिया।

देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ की डीसीसीडीएल में 66.66 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि शेष 33.34 प्रतिशत हिस्सेदारी सिंगापुर के सरकारी संपत्ति कोष जीआईसी के पास है।

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प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी)

Gurgaon: प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 तक 2 करोड़ सरकारी आवास बनाने का लक्ष्य रखा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इस लक्ष्य को पाने के लिए कई पहल की है। प्रधान मंत्री मोदी अपनी रैलियों में इसके बारे में बात करते रहते हैं। आइए जानते हैं पीएम मोदी की इस महत्वाकांक्षी योजना के बारे में..

भारत सरकार ने पिछले 3 सालों में प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 51 लाख घरों को मंजूरी दी, जिनमें 28 लाख घर विभिन्न चरणों में बनकर तैयार होंगे। इसके अलावा 8 लाख से अधिक घर पहले ही बनकर तैयार हो चुके हैं और करीब 8 लाख घर लाभार्थियों द्वारा लिए जा चुके हैं। पिछले महीने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत 6,26,488 घरों के निर्माण को मंजूरी दी है।

अगर राज्यों की बात करें तो, उत्तर प्रदेश को इस योजना का सबसे अधिक लाभ मिला है। यूपी के लिए 2,34,879 घरों को मंजूरी दी गई जबकि आंध्र प्रदेश के लिए 1,40,559 घरों को मंजूरी दी गई है। प्रस्तावित घरों में, सीएमएमसी से अंतिम मंजूरी के बाद पीएमए (यू) के अंतर्गत 60,28,608 का अनुमोदन किया गया है।

मध्यप्रदेश के लिए मंजूर किए गए घरों की संख्या 74,631, बिहार के लिए 50017, छत्तीसगढ़ 30,371 और गुजरात के लिए 29,185 है। महाराष्ट्र को 22,265 घर जबकि तमिलनाडु के लिए 20,794 घरों को मंजूरी दी गई है। वहीं, ओडिशा के लिए 13,421 घरों को मंजूरी दी गई है जबकि त्रिपुरा के लिए 9,778 और मणिपुर को 2,588 घरों की मंजूरी दी गई है।

केरल में बाढ़ के कारण पनपे हालात के बाद केंद्र ने केरल की सरकार से पीएम आवास योजना के तहत बनने वाले घरों के लिए नया प्रस्ताव मांगा है। इनमें बाढ़ प्रभावित व्यक्तियों और परिवारों को शामिल किया जाएगा जो पीएमए (यू) के तहत पात्रता रखते हैं। 486.87 करोड़ की राशि केरल के लिए पहले ही स्वीकृत की जा चुकी है। केंद्र सरकार ने इसके अलावा इसके कार्यान्वयन की मंजूरी भी दी है।

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Real state Agent बनना है तो...

लाइसेंस हासिल कर बन सकते हैं Real Estate एजेंट,बढ़ते क्रेज को देख कॉलेजों ने भी शुरू किये कोर्स

Gurugram: कम समय से इंसान को मोटा मुनाफ़ा देने वाला व्यापार Real Estate इन दिनों काफी फल-फूल रहा है। ऐसे में अब लोग इस बिजनेस में हाथ आजमाने के साथ ही इसके साथ जुड़ने का मन भी बना रहे हैं। साथ ही कई कॉलेजों ने तो अब रियाल स्टेट बिजनेस से जुड़े कुछ कोर्स भीब शुरू कर दिए हैं। जो रियल स्टेट बिजनेस से जुडी है। अगर आप Real state Agent बनना है तो उसके लिए आपको इसकी शिक्षा से लेकर लाइसेंस भी प्राप्त करना होगा।

गौरतलब है कि, रियल स्टेट बिजनेस में आजकल काफी अधिक लोग शामिल हो गए हैं। इसको देखते हुए कई शिक्षा संस्थानों में अब रियल स्टेट एजेंट बनने के लिए कोर्स चालू किये हैं। तो अगर आप भी रियल स्टेट एजेंट बनना चाहते हैं तो इसके लिए आपको लाइसेंस, जरुरी दस्तावेज से लेकर शिक्षा हासिल करनी होगी जिसकी एक पूरी प्रक्रिया है।
एजेंट लाइसेन्स जरुरी

वहीं Real Estate Agent बनने के लिए आपको लाइसेंस प्राप्त करना होगा जिसके लिए आपको स्टेट और नेशनल एक्जाम पास करना जरूरी है। इसके अतिरिक्त, आपकी क्रिमिनल बैकग्राउंड की जांच भी हो सकती है। रियल एस्टेट सेल्स पर्सन के लिए कोर्स, एक्जाम और लाइसेन्स फीस आदि के आधार पर आपको कुछ फीस भी देनी पड़ सकती है, राज्य के अनुसार यह अलग-अलग हो सकता है। आप इसके लिए कोचिंग भी कर सकते हैं। तो अब यह सभी विकल्प आपके पास हैं और अब आप जिस भी क्षेत्र में अपना करियर शुरू करना चाहते हैं तो कर सकते हैं।

एजेंट बनने के लिए प्राप्‍त करें शिक्षा

अगर आपको भी Real Estate agent बनना है तो उसके लिए आपको यह जरुरी नहीं है कि, आप किस राज्य में हैं। एजेंट बनने के लिए आपको प्री-लाइसेंसिंग कोर्स कर सकते हैं। लेकिन कुछ राज्यों में कुछ अलग जरूरतें होती हैं। उदाहरण के तौर पर, विदेशों में जैसे कैलिफोर्निया में कॉलेज लेवल के तीन कोर्से करने की आवश्यकता होती है। आपके राज्य में लाइसेन्स के लिए आवश्यक जरूरतों के लिए आप राज्य के रियल एस्टेट कमीशन से संपर्क कर सकते हैं। तो अगर आप भी रियल स्टेट बिजनेस में हाथ आजमाना चाहते हैं तो यह विकल्प आपके लिए सबसे ख़ास हो सकता है। रियल स्टेट बिजनेस में आपको शिक्षा प्राप्त करने के बाद देश के किसी भी राज्य में आप अपना व्यापार शुरू कर सकते हैं।

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Home Loan....

आमतौर पर होम लोन (home loan) लेते वक्त लोग पूरा ध्यान कम ब्याज दर पर आसानी से कैसे मिल जाए, इसी पर देते हैं। इससे उस वक्त तो उनको आराम हो जाता है, लेकिन कहीं न कहीं उनको होम लोन की बेहतर डील नहीं पाती है। ऐसे में जरूरी है कि बाद में इस होम लोन (home loan) को कैसे बिना परेशानी के कैसे जल्द चुकाया जाए यह समझा जाए। होम लोन (home loan) लोन को जल्द चुकाने के तीन ऐसे फॉर्म्यूले हैं, जो बैंक या वित्तीय संस्थान भी आपको नहीं बताते हैं। क्योंकि अगर होम लोन (home loan) जल्द पटा दिया जाता है तो इससे बैंक और वित्तीय संस्थान को कम ब्याज मिलता है, जबकि होम लोन (home loan) लेने वालों का काफी पैसा बचता है। आइये जानते हैं होम लोन (home loan) जल्द चुकाने के ये 3 फॉर्म्यूल और इससे होने वाले फायदे।

पहले जाने 30 लाख रुपये के होम लोन (Home Loan) का गुणा-गणित

अगर आप 30 लाख रुपये का होम लोन (Home Loan) 25 साल के लिए लेते हैं और इस पर 9 फीसदी का ब्‍याज (Interest Rates) देते हैं तो आपको होम लोन पूरा होने पर कुल मिला कर 75.53 लाख रुपये पटाना पड़ेगा। इस होम लोन (Home Loan) पर आपकी किस्‍त (EMI) 25176 रुपये की होगी।

लेकिन अगर 30 लाख रुपए का होम लोन (Home Loan) 9 फीसदी ब्‍याज (Interest Rates) पर ही लिया जाए लेकिन यह 20 साल के लिए लिया जाए तो आपको यह होम लोन (Home Loan) करीब 10.75 लाख रुपये सस्‍ता पड़ेगा। क्‍योंकि आपको इस होम लोन (Home Loan) के लिए केवल 64.78 लाख रुपए ही चुकाना होगा। हालांकि 20 लाख रुपये के होम लोन (Home Loan) के लिए आपको हर माह 26992 रुपये की किस्‍त (EMI) पटानी होगी। इस प्रकार हर माह किस्‍त (EMI) के रूप में 1816 रुपये ज्यादा देकर आप 10.75 लाख रुपये बचा सकता है। लेकिन अगर आप होम लोन (Home Loan) ले चुके हैं तो आगे बताए जा रहे 3 तरीकों से इसे समय से पहले पटा कर काफी पैसा बचा सकते हैं।

होम लोन (Home Loan) जल्द पटाने का पहला तरीका
अगर आपके पास होम लोन (home loan) पटाने के लिए ज्‍यादा पैसा नहीं है तो भी आपके लिए एक विकल्‍प है। इसके तहत आप हर साल होम लोन (home loan) की एक किस्‍त अतिरिक्‍त जमा करते जाएं। केवल इतना ही कर देने से यह होम लोन (home loan) 25 साल की जगह 19 साल 3 माह में पट (home loan prepay) जाएगा। यानी आपका होम लोन (home loan) करीब 5 साल 9 माह पहले खत्‍म हो जाएगा। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि 30 लाख रुपये का होम लोन अगर 25 साल के लिए जाए तो किस्‍त (EMI) 25176 रुपये आएगी। ऐसे में अगर आप साल में एक बार केवल 25176 रुपये होम लोन अकाउंट में डाल देंगे तो यह फायदा आपको मिल जाएगा।



होम लोन (Home Loan) जल्द पटाने का दूसरा तरीका

अगर आप थोड़ा ज्‍यादा पैसा लगा सकते हैं तो यह होम लोन (home loan) और जल्‍द पटाया जा सकता है। इसके लिए आप हर साल अपनी EMI (किस्‍त) को 5 फीसदी बढ़ाते जाएं। ऐसा करने से आपका 25 साल का होम लोन (home loan) केवल 13 साल 3 माह में ही पटाया (home loan prepay) जा सकेगा। इस प्रकार आपका समय करीब आधे से भी ज्‍यादा बच जाएगा। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि 30 लाख रुपये का होम लोन अगर 25 साल के लिए जाए तो किस्‍त (EMI) 25176 रुपये आएगी। ऐसे में अगर आप हर साल अपनी मूल किस्त के अलावा करीब 12500 रुपये होम लोन अकाउंट में डाल देंगे तो यह फायदा आपको मिल जाएगा।



होम लोन (Home Loan) जल्द पटाने का तीसरा तरीका

अगर आप थोड़ा और पैसा लगा सकते हैं, तो यह लोन (loans) और जल्‍द पटाया (home loan prepay) जा सकता है। अगर कोई हर साल अपनी किस्‍त (EMI) 10 फीसदी बढ़ाया जाए तो यह लोन (loans) केवल 10 साल 2 माह ही पटाया जा सकता है। इस प्रकार आपका करीब 15 साल बच जाएगा। जैसा कि ऊपर बताया गया है कि 30 लाख रुपये का होम लोन अगर 25 साल के लिए जाए तो किस्‍त (EMI) 25176 रुपये आएगी। ऐसे में अगर आप हर साल अपनी मूल किस्त के अलावा करीब 25000 रुपये होम लोन अकाउंट में डाल देंगे तो यह फायदा आपको मिल जाएगा।



होम लोन (home loan) के पहले यह बात रखें याद

होम लोन (Home Loan) लेने के पहले ज्‍यादातर लोग सिर्फ ब्‍याज दरों (Interest Rates) की जानकारी करने में ही अपना पूरा समय लगा देते हैं। जबकि होम लोन (Home Loan) लेने से पहले जरूरी होता है कि यह हिसाब (Home Loan Planning) लगाना जाए कि कितने समय का लोन (Loan) उन्‍हें सस्‍ता पड़ेगा। क्‍योंकि होम लोन (Home Loan) अगर 20 या 25 साल का लिया जाए तो यह 5 साल का यह अंतर ही 10 लाख रुपये से ज्‍यादा का आप पर बोझ डाल देगा। इसीलिए अगर सही प्‍लानिंग से होम लोन (Home Loan) लिया जाएगा तो आपको अपना घर (Home) लाखों रुपये सस्‍ता पड़ सकता है।

किस्‍त को लेकर भ्रम
लोगों को लगता है कि ज्‍यादा समय का होम लोन (Home Loan) उन्‍हें सस्‍ता पड़ता है। लेकिन एक बात सभी को समझना चाहिए कि बैंक अपना प्रॉफिट नहीं छोड़ते हैं। वह पाई-पाई ग्राहक से ही वसूलते हैं। इसलिए होम लोन (Home Loan) के मामले में इस बात को ध्‍यान में रखना चाहिए। ऊपर बताए लोन में अगर 25 साल की जगह 20 साल का होम लोन (Home Loan) लिया जाए तो लोगों का 10.75 लाख रुपये बचेगा। जबकि इसके लिए हर माह 1816 रुपये महीने किस्‍त (EMI) के रूप में ज्यादा देना होगा। हालांकि ऐसा करने में 20 साल में किस्त के रूप में आपको करीब 4.35 लाख रुपये ज्‍यादा देंगे होंगे लेकिन आपकी लोन की जिम्मेदारी करीब 10.75 लाख रुपये कम हो जाएगी। इस प्रकार शुद्ध रूप से आपका फायदा होगा करीब 6.40 लाख रुपये का होगा। यहां पर फायदे से मतलब है कि 25 साल में चुकाया गया होम लोन और 20 साल में चुकाया गया होम के अमाउंंट का अंतर। लेकिन ऐसा तब ही होता है जब आप अच्‍छी प्‍लानिंग (Home Loan Planning) के साथ होम लोन (Home Loan) लें।



लोन के लिए जरूरी दस्‍तावेज Documents Required For Home Loan

-Identity proof - पहचान पत्र

-Age proof- आयु का प्रमाण
-Address proof - पते का प्रमाण
-Proof of educational qualifications - शैक्षिक योग्यता का प्रमाण
-Employment details - रोजगार की विस्तृत जानकारी
-Income proof - आय का प्रमाण (जिसके लिए आप को पिछले तीन साल के Income Tax Returns दिखाने होंगे)
-Details about the property if finalized - संपत्ति का विवरण (यदि अंतिम रूप में हो)
-Bank statements - बैंक स्टेटमेंट



होम लोन (home loan) से जुड़े जरूरी शब्‍द, इनका जानें मलतब

-Home Loan Process - होम लोन लेने की प्रक्रिया

-Cost of Property - मकान की लागत
-Own Contribution - स्वंय लगाई जाने वाली राशि
-EMI Affordability - क्या आप लोन की किश्तों का भुगतान में सक्षम हैं|
-Loan Period - लोन की अवधि जितने समय के लिए इसे दिया जा रहा हो.
-Interest Rate - ब्याज दर
-EMI - ऋण की किश्तें
-Loan Period - लोन की अवधि
-Interest Type - Fixed or Floating Interest rate
-Processing Fees - प्रोसेसिंग चार्ज
-Loan Prepayment Terms - लोन समय से पहले बंद करने की शर्तें और जुर्माना
-Penalty for Late Payment - लेट EMI का जुर्माना
-Loan Agreement - सभी शर्ते दस्तावेज में लिखी है या नहीं
-Loan Approval Process - लोन स्वीकृत करने की प्रक्रिया
-Terms and Conditions - नियम और शर्ते
-Tax Benefits - टैक्‍स लाभ
-Home Loan Transfer Process - लोन को अन्य बैंक में हस्तांतरित करने की शर्तें.

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Municipal Corporation of Gurugram new Order...

The National Green Tribunal (NGT) on Wednesday directed the Municipal Corporation of Gurugram (MCG) and its concessionaire for waste management in the city, Ecogreen Energy, to seek environmental clearance for the Bandhwari landfill from the ministry of environment and forests (MoEF) at the earliest. The order was made in view of a February report by the Central Pollution Control Board (CPCB) that noted violations of environmental law at the landfill site and the lack of environmental clearances, more than two years after Ecogreen was contracted by the civic authority.

The NGT had, on March 2, admonished the MCG and Ecogreen for improper waste management in Bandhwari, and asked both parties, on March 8, to present plans to remedy the situation, along with reasons why prosecution should not be initiated against them.
On Wednesday, the court directed the bodies to seek an environmental clearance from the MoEF to proceed with their proposed solutions. However, according to the original contract between the two parties, Ecogreen is required to set up a waste-to-energy plant on site to help dispose the 1,500 metric tonnes of untreated municipal waste dumped at the site daily.

Yashpal Yadav, MCG commissioner, did not respond to multiple requests for comment. Gaurav Joshi, chief operating officer, Ecogreen Energy, declined to comment on the matter as it is sub-judice, but confirmed that the operations at Bandhwari were on without any environmental clearance from the MoEF.

In a parallel development, officials of the Haryana State Pollution Control Board (HSPCB) confirmed on Friday that they initiate legal action against the MCG in the Faridabad environment court, for violation of the Solid Waste Management Rules, 2016, at Bandhwari. The move was confirmed by member secretary S Narayanan and regional officer (Gurugram), Kuldeep Singh, who said, 'The case has not been registered yet, but the paperwork is ready and it will be filed soon.'

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Gurugram Builder fined Rs 10 crore...

The National Green Tribunal (NGT) on Monday ordered developer Ansal Buildwell and its sister concern, Aadharshilla Towers, to pay a penalty of Rs 10 crore to the Central Pollution Control Board (CPCB) for violating environmental norms in Sushant Lok 3.

Monday's order comes in response to a petition filed by Bala Yadav, a Sushant Lok 3 resident, in 2016. Ensuing legal proceedings revealed the residential colony, spread across 199 acres in Sector 59, lacks the required environmental clearances.

Moreover, the developer has been accused of trading in land that was initially earmarked for public use and green belts. About 90 acres of the 199 acres were reserved for community use, according to the Revised Layout Plan sanctioned by the DTP. However, only about 30 acres have been left for this purpose. 'In many locations, community land has been encroached on to build transformer stations, commercial establishments, cabins for security guards and others,' said Yatish Kumar Goel, advocate for the complainant.

These violations have been acknowledged by at least two committees instated by the green court, in 2017 and 2018. They also include lack of 'consent to establish' and 'consent to operate' permissions granted to real estate projects by the Haryana State Pollution Control Board (HSPCB) under the Air Act and the Water Act.

A three-judge bench, headed by NGT chairman Adarsh Kumar Goel, observed, 'Groundwater was being extracted (without required clearances). There was no STP for sewage treatment… Rainwater harvesting system was not maintained as per Haryana Building Code, 2017, and groundwater recharge was not being done as required. There was no effective system of collection of solid waste. There was no compliance of C&D Waste Rules. Diesel generators are operating without adequate stack height.'

Ajay Pandita, a spokesperson for Ansal Buildwell, said, 'I have not yet seen a copy of the order and will not be able to comment until I read it carefully.' Pandita did not clarify whether the interim compensation of Rs 10 crore would be submitted to the CPCB as directed.

The NGT bench also came down heavily on the HSPCB for not taking preventive and punitive measures against the developer in light of these violations. 'It is surprising that in spite of the report submitted about five months back showing violation of law, no action has so far been taken by the statutory authorities, particularly the Haryana State Pollution Control Board,' stated Monday's order.

The court has also directed the HSPCB to remedy its inaction and submit a report of the same within three months. Kuldeep Singh, regional officer (Gurugram), HSPCB, said, 'We sent the developer showcause notices in November after receiving the inquiry committee's report, and their responses to us were not satisfactory. We then replied asking for a list of responsible persons and partners so that we could proceed with filing a suit in the environmental court in Faridabad, but the project proponent have not yet provided us with these details.'

Ansal Buildwell has also been instructed to deposit an additional ₹5 crore as a 'performance guarantee', with the understanding that the project will 'comply with the statutory norms within three months'. Failing this, this amount will be forfeited by the developer.

The matter is set to be heard next in July.

Similar environmental violations were earlier noted in Sushant Lok 1, which was developed by Ansal API — a separate company no longer associated with Ansal Buildwell. In December, the NGT concluded that the developer was in violation of various green norms, such as proceeding with construction without environmental clearances, illegal extraction of groundwater, dysfunctional rainwater harvesting infrastructure, mismanagement of construction and demolition waste and poor management and disposal of sewage. That matter was disposed of by the NGT in January, which recommended closure of the project and directed a CPCB-led panel to take appropriate action and file an action-taken report by April.

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Land or Apartment

While buying a plot of land gives you a bigger sense of ownership, an apartment offers greater security. Read on to know what's best for you.

Land or Apartment
The apartment culture has taken over the residential market in major cities of India, but people still cherish the desire to buy a plot of land and build their own home. If you intend to do so, you must gauge several aspects such as the cost of building, appreciation, financial assistance and income, carefully. Ajit Narasimhan, Category Head - Savings and Investments, BankBazaar.com, says, "Investing in real estate is almost always rewarding if you do it the right way. The key is to identify what you need out of your investment - regular returns or higher appreciation over time - and match it to your investment capacity. The trick lies in not over-stretching and never ever cutting down on the due diligence necessary." Here's a comparison to understand what makes more sense - an apartment or a plot of land.

Investment

Buying a ready-to-move-in flat requires you to pay a lump-sum amount or take a loan and pay EMIs over a period of time. This means you pay as you start living in the house. However, buying a plot requires you to have funds at your disposal to construct the property on the land bought and turns out to be more expensive compared to buying a flat of a similar size and dimension.

Cost of purchasing a flat or land depends on the location. If you are considering purchasing a plot within city limits in a metro - where space is a constraint - the price would be much higher than what you would pay for a flat. On the other hand, if you were to invest in land in one of the Tier-II cities in India, you would be able to acquire a substantial plot of land at a much lower price. The thing to remember is that while several banks offer loans to buy a flat, not many offer loans for plots.

Also, building your own home demands not only money but constant monitoring of the construction process. Ashwinder Raj Singh, CEO, Residential Services, JLL India, says, "When you buy a plot, you have to regularly monitor the construction activity and there are chances of a project going over budget since a common man does not have the experience and expertise of constructing properties on a regular basis. But with a flat, a fixed amount is to be paid to the builder for the basic set of requirements that are pre-decided as per the agreement."

Besides, converting a plot to a residential area requires several permissions and clearances from civic bodies. "Unlike in the case of flats where the builder is responsible to get all these in place, you would need to secure this yourself if you plan to build your house in your plot. This is time-consuming," adds Narasimhan.

Scope of Resale

When you construct your own home, you do it as per your liking and taste, which may not necessarily appeal to a potential buyer when you decide to sell it. He will then have to either invest more in renovating it or pulling it down altogether to build a new one. This can impact the selling price of the property to a great extent. This disadvantage is absent in the case of apartments because they come with a fixed structure that's part of a building and, hence, easier to sell at the market price without much bargaining.

Amenities impact the resale price, too. "Prices of flats rise higher and faster given their limited number compared to independent houses which may not boast extra facilities that a housing society provides. The only advantage plots have is that the buyer gets to own the land and can construct a new house or an entirely new building to make profits," Singh says. Narasimhan believes that houses have a higher resale value than flats, "primarily because the person buying the house also becomes the owner of the plot of land on which the house has been constructed".

Return on Investment

When it comes to independent houses, the value of the land rises, but the built-up property's value keeps going down over the years due to usage and resulting deterioration. The seller has to regularly invest in its upkeep.

A flat's worth keeps increasing consistently since it is always in demand due to its affordability factor. However, the owner of a plot can make profits on his investment if he plans wisely by constructing multiple floors and renting them out. Also, as lesser number of houses is being built on plots, their demand is rising amongst those who can afford them. Purchasing plots purely for investment purposes can yield healthy profits, too.

Safety

It is imperative to be sure that the plot one is investing in is free of all legal complications; that the seller has all the required deeds and documents in place to sell the land and there is no dispute - criminal or civil - associated with that piece of land. "A lot of frauds happen where the buyers are duped into buying government-owned lands or plots under legal scrutiny. This is normally not the case while buying a flat, as necessary permissions are in order from the municipal authorities and a builder only constructs and sells the property after undergoing due diligence in most cases," Singh says. The other factor is security. A housing society is well-protected and guarded round the clock and has state-of-the-art security systems and a lot of families around, which means the probability of something untoward happening is low. Living independently means investing in security from your own pocket.

Conclusion

Choose the best option after analysing your needs, financial abilities and liabilities. If you are merely looking to invest your funds for a few years until you are ready to invest in a flat, a plot in a location that will see appreciation in the future would be a good idea. However, if you are looking for regular returns, you may want to consider investing in a flat.

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Unitech के फंसे प्रोजेक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आम्रपाली की तरह यूनिटेक का भी फोरेंसिक ऑडिट होगा.

नई दिल्ली: यूनिटेक के अधूरे प्रोजेक्ट मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा. पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि आम्रपाली की तरह यूनिटेक का भी फोरेंसिक ऑडिट होगा. सुप्रीम कोर्ट ने ऑडिटर नियुक्त करने का आदेश दिया था, जो साल 2006 से यूनिटेक की सभी 74 कंपनियों और उनकी सहायक कंपनियों के खातों का ऑडिट करेगी. कोर्ट ने दोनों फोरेंसिक ऑडिटर को अदालत में पेश होने के लिए कहा था. कोर्ट में संजय चंद्रा की ओर से पेश वकीलों ने उनकी जमानत के किए कई बार आग्रह किया था, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया था कि जब तक फोरेसिंक ऑडिट नहीं हो जाता, तब तक जमानत की अर्जी पर विचार नहीं होगा.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण कंपनी को आदेश दिया था कि वह कोलकाता में संपत्ति की नीलामी से प्राप्त राशि से अपनी पांच परियोजनाओं के 514 फ्लैटों का निर्माण करे. कोर्ट को बताया गया था कि कोलकाता में ग्रुप की संपत्ति की जस्टिस एसएन ढींगरा की अध्यक्षता वाली समिति की निगरानी में नीलामी की गई. जस्टिस ढींगरा दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश हैं. ग्रुप की कोलकाता में संपत्ति 116. 95 करोड़ रुपये में नीलाम हुई है और अब तक 28. 89 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि इस राशि का डिमांड ड्राफ्ट अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराया जाए. इसके बाद रजिस्ट्री इस रकम को सुप्रीम कोर्ट परिसर में स्थित यूको बैंक में शॉर्ट टर्म फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा करा देगी. इस मामले में न्यायमित्र अधिवक्ता पवनश्री अग्रवाल ने कहा था कि खरीददार द्वारा दिए गए आश्वासन के मुताबिक बाकी रकम को भी एक हफ्ते में जमा करा दिया जाएगा. पवनश्री ने अदालत का ध्यान उसके 27 जुलाई के उस आदेश की ओर आकृष्ट कराया कि कुछ राशि से 514 फ्लैटों को निर्माण कराकर उन्हें गृह खरीददारों को दिया जा सकता है. विशेषज्ञ समिति ने इन फ्लैटों के निर्माण के लिए जिन पांच परियोजनाओं का चयन किया है उनमें गुरुग्राम की विस्टा, मोहाली की यूनीहोम्स, ग्रेटर नोएडा की होरिजन और वर्व और नोएडा की यूनीहोम्स-117 शामिल हैं.

यूनिटेक के अधूरे प्रोजेक्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश एसएन ढींगरा की अध्यक्षता में गठित समिति को यूनिटेक समूह की कोलकाता स्थित संपत्ति बेचने का निर्देश दिया था. साथ ही मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली पीठ ने समिति से कहा कि वह 25 करोड़ रुपये घर खरीदने वालों को बांटने का आदेश दे. कोर्ट ने पांच जुलाई को जस्टिस ढींगरा समिति से आगरा, वाराणसी और श्रीपेरुंबदूर में स्थित समूह की संपत्ति बेचने को कहा था.

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Gurugram

Gurugram: After the state government renamed India’s corporate hub and rising metropolitan city Gurgaon to
‘Gurugram’, residents of the city have come up with mixed reactions.

While justifying Haryana government’s stand, a spokesman said, “Since long, the people of the area had been demanding that Gurgaon be renamed as Gurugram."

"Haryana is a historic land of the Bhagwat Gita and Gurgaon had been a centre of learning. It had been known as Gurgaon since the times of Guru Dronacharya. Gurgaon was a great center of education where the princes used to be provided education.

Here are 5 reasons why the name has been changed:


Residents of the city demanded that Gurgaon be renamed as Gurugram: Haryana Government
Representations received at several fora that it would be appropriate to rename Gurgaon as Gurugram, according to an official spokesman of the government.
Haryana is a historic land of the Bhagwat Gita and Gurgaon had been a centre of learning.
It had been known as Gurgaon since the times of Guru Dronacharya. Gurgaon was a great center of education where the princes used to be provided education.
The village was given as gurudakshina to him by his students - the Pandavas - and hence it came to be known as Guru-gram, which in course of time is said to have got distorted to Gurgaon.

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Gurgaon

Gurgaon is a city just southwest of New Delhi in northern India. It’s known as a financial and technology hub. The Kingdom of Dreams is a large complex for theatrical shows. Sheetala Mata Mandir is an orange-and-white-striped Hindu temple. The Vintage Camera Museum showcases cameras and prints spanning a century. West of the city, Sultanpur National Park is home to hundreds of bird species.

GURGAON: DLF is getting ready to offer an iteration of CyberHub, the most prominent F&B and entertainment destination in the National Capital Region, in another part of Gurgaon – on the tony Golf Course Road. The up and coming low-rise area dedicated to gastronomy is located at Horizon Centre Complex, bang opposite luxury apartment complexes such as Aralias and Magnolias — home to CEOs and CXOs — and in the vicinity of DLF Phase 5 high-rises.

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Top 100 realtors’ wealth soars 27% to Rs 2.37 tln : Report

Despite the crisis in realty space in the country, which is home to the largest number of homeless in the world, networth of top 100 realtors has jumped 27 per cent to Rs 2.37 trillion , as per a report that’s led by Lodha Group founder Mangal Prabhat Lodha.

Significantly, the country’s largest developer DLF group Gurgaon and its founder KP Singh, who was the richest real estate entrepreneur in 2017, does not find a place among the top 10 developers in the country this year.

According to the Hurun rich-list 2018, the 62-year-old Lodha, who is also a senior BJP leader, is the richest real estate entrepreneur in the country with total wealth of Rs 27,150 crore. He is followed by Jitendra Virwani of the Bengaluru-based Embassy group with total wealth of Rs 23,160 crore in 2018.

The city-based Lodha was at the second position last year with a wealth of Rs 18,610 crore, while DLF’s Kushal Pal Singh, who had topped the list last year with a wealth of Rs 23,460 crore, does not figure in the year’s top 10 list. However, his son Rajiv Singh comes third with wealth of Rs 17,690 crore this year. It can be noted that the senior Singh has moved out of daily operations of DLF and has transferred his shares to his son Rajiv and daughter Piya.

“Total wealth of the top 100 real estate developers stood at Rs 2,36,610 crore or $ 32.7 billion in 2018, up 27 per cent from Rs 1,86,700 crore or $ 28.6 billion in 2017,” says the Hurun-Grohe India (German sanitary ware maker) rich- list 2018.

The list relates to those realtors born and brought up in the county, and the valuation of these individuals is as of end-September 2018 when the rupee averaged at 72.46 to the dollar, according to the publishers. Almost 59 per cent of the names featured in the report are first-generation entrepreneurs, says the report. From a city-wise perspective, Mumbai is the most preferred city of residence for the real estate tycoons with the city being home to 35 of them, followed by Delhi (22) and Bengaluru (21) and Pune which is home to five of the richest 100 realtors.

At the fourth slot is Chandru Raheja of the city-based K Raheja group with a networth of Rs 14,420 crore, followed by Vikas Oberoi (Rs 10,980 crore). The Hiranandani brothers, Niranjan of Hiranandani Group and Surendra of House of Hiranandani, come at the sixth slot with a wealth of Rs 7,880 crore each, and the billionaire brothers Manoj and Raj Menda of Bengaluru are at the ninth position with a wealth of Rs 5,900 crore each.

Ajay Piramal and family are the seventh slot with a combined wealth of Rs 6,380 crore. The list also features nine women entrepreneurs, with Renuka Talwar of DLF ranked at 19 topping the list.

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Commercial realty of Delhi NCR witness boost...

With the highest per capita income, Delhi offers immense opportunities for individuals to prosper in the state. Delhi’s per capita is almost triple of the country’s, making it most sought after ‘job seeking’ destination. The big statistical boost has made Delhi number 1 destination for migrants from all parts of the country. The rising population triggered the growth eruption of NCR evolving it as top spot for real estate investment. Due to this tangential development, areas such as Gurgaon, Noida and Greater Noida have emerged as the major urban centres of NCR.

Being a preferred hub for fortune 500 companies, NCR today sits at the pinnacle of India’s commercial real estate map. Speedy growth in services sectors like IT/ITeS, BFSI, Telecom, etc., extensions of industrial corridors and favorability amongst MNCs has paved a strong growth path for NCR’s robust economy and real estate sector. A recent study highlighted that NCR accounted for 28% of the office absorption in India.

The rapid growth of NCR’s realty sector can be easily attributed to growth in population, rise in the number of nuclear families, easy availability of finance, repatriation of NRIs and HNIs and rise in disposable income. This steady augmentation offered a rise in the disposable income instigating a boom in consumerism pushing Organised retail sector to grow with 25-30 per cent annually. This has resulted in the coming up of many commercial projects including Malls, Multiplexes, Shopping complexes, Food Courts, Supermarkets, co-working spaces, business centers etc. Growing importance of F&B is becoming the USP for malls. In fact, over the past five years, the space taken up by F&B has experienced faster footfalls across malls and will be the ‘experiential differentiator’ in future. Shoppers are increasingly chasing experiences, not just merchandise.

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Gurgaon’s residential real estate market in revival mode...

Gurgaon's dominance as a corp hub and connectivity to Delhi are providing an impetus to realty growth

Over the past two years, the residential real estate markets in India have been passive. In Gurgaon, until the middle of 2016, the city witnessed subdued transaction activity and restricted new supply, with the demonetisation drive further impacting the market. Cautious buyer sentiment, coupled with high levels of unsold inventory, resulted in a slowdown in construction activity and sales.

While there were a few projects in the third quarter of last year, the focus of most developers continued to be on of existing inventory, completing their ongoing projects and defer-ring new project launches. Ambiguity around the implementation of the Real Estate (Regulation & Development) Act (RERA) during the first half of the year resulted in transaction activity remaining low.

On the flip side, the office market continued to see robust demand. During the April-to-June period this year, Delhi NCR witnessed close to 2 million square feet of office space absorption. A majority of this take-up was recorded in the Gurgaon micro-market. Due to sustained occupier interest, Golf Course Road, DLF Cyber City and NH8 contributed to almost 50% of leasing activity here. IT and SEZ spaces were the preferred options by occupiers.

This positive traction in the office market, improving clarity around RERA, coupled with the effects of the demonetisation drive dissipating, are resulting in transaction activity in Gurgaon's residential segment witnessing an uptick in recent months.

According to our research, Gurgaon's dominance as a corporate hub, availability of quality residential options, continuously improving infrastructure and connectivity to Delhi as well as expansion of civic amenities in and around NH8, Golf Course Road and Dwarka Expressway are providing an impetus to the growth of the real estate market. It is also helping to attract significant investments into the segment. Institutional investors continue to remain bullish on the market thanks to the commercial office segment being in overdrive and emerging areas of Gurgaon offering excellent residential development opportunities.

Most of the demand and supply for residential property has been concentrated in the mid-end to high-end segments. This is indicative of a revival in the city's housing market. For an end-user looking to invest in the market, the rapid infrastructure development has helped to expand the market for residential options. In the months ahead, we expect housing activity to further improve, albeit slowly. Demand would be concentrated in the high-end/mid-end segments and primarily in the upcoming micro-markets of the city including the Southern Periphery Road (Sectors 68-74), New Gurgaon (Sectors 78-85), sectors near Manesar (Sectors 86-95) and the Dwarka Expressway (Sectors 88-115).

With a continuously growing population, a burgeoning office market, more affordable prices than two years ago and lower interest rates, the long-term demand dynamics for Gurgaon's housing segment continue to be strong.

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GST Council Approves For Under-Construction Properties only 5 %...

Gurugram- Your dream home may become more affordable and cheaper as the Goods and Services Tax (GST) Council on Sunday slashed tax rates on under-construction housing properties to 5 per cent without input tax credit, from the existing 12 per cent ahead of national polls due by April-May. GST rate on affordable housing projects too has been lowered from an effective 8 per cent to 1 per cent.



Currently, 12 per cent GST is levied on payments made for under-construction property or ready-to-move-in flats where completion certificate has not been issued at the time of sale. However, GST is not levied on buyers of real estate properties for which completion certificate has been issued at the time of sale.



After the GST Council meeting, Union Finance Minister Arun Jaitley on Sunday announced that the lowering of GST tax rates on under construction housing properties from the existing 12 per cent to 5 per cent without input tax credit. “The council also cut GST rates on affordable housing to 1 per cent from the current 8 per cent and expanded the scope of affordable housing to those costing up to Rs 45 lakh and measuring 60 sq metre in metros and 90 sq metre in non-metro cities” explained Jaitley. The new tax rates will come into effect from April 1, 2019. Homebuyers of metropolitan cities Bengaluru, Chennai, Delhi NCR (limited to Delhi, Noida, Greater Noida, Ghaziabad, Gurgaon, Faridabad), Hyderabad, Kolkata and Mumbai (whole of MMR) will benefit from it.



“This will be a major step in our efforts to give ‘boom’ to the real estate sector and making housing affordable for the middle class, neo-middle class, and aspirational class,” Jaitley said while briefing reporters after the GST Council meet. No tax is levied in cases where completion certificate has been issued at the time of sale. However, builders will not be able to claim input tax credit (ITC) under the new GST rates.



The council, headed by Jaitley, decided on cutting tax rates on under-construction housing property after due consideration to reports of a Group of Ministers (GoM) on real estate sector. In both the cases, builders will not be able to adjust the taxes paid on raw materials like cement and steel against the final tax liability on under-construction properties. This was not the case earlier.



“This (GST reduction) decision will certainly give boost to construction sector,” Jaitley said. Bihar Deputy Chief Minister and Finance Minister Sushil Kumar Modi took to Twitter and said the GST rate for affordable housing was reduced from 8 per cent to 1 per cent and for non-affordable from 12 per cent to 5 per cent without ITC.



“Definition of affordable changed to 90 sq mtr and 60 sq mtr for non-metro and metro with a capping of Rs 45 lakh for both,” he added.



With regard to lotteries, the GST Council, however, deferred its decision with Jaitley saying the Group of Ministers (GoM) will meet again to discuss the proposal.



Currently, State run lotteries attract 12 per cent GST, while State-authorised ones attract 28 per cent.



The GST Council meeting had remained inconclusive on Wednesday and was adjourned for February 24.



Builder lobbies, including the Confederation of Real Estate Developers’ Association of India (Credai) and the National Real Estate Development Council have been demanding a reduction in the GST rate for a while now.



ANAROCK Property consultants chairman Anuj Puri said that the slash in GST rates to 5% without ITC from the previous 12% with ITC for premium homes, and to 1% minus ITC for affordable homes from the earlier 8%, gives the beleaguered realty sector the much-needed breathing room and will certainly help it maintain some forward momentum in 2019. ANAROCK data confirms that there are as many as 5.88 lakh under-construction homes lying unsold in the top 7 cities. Of these, 34% are priced below INR 40 lakh alone.



What The Real Estate Sector Thinks A 5 percent GST on under-construction properties will make a “world of difference” for the properties whose construction was in progress, says Niranjan Hiranandani, the Managing Director of Hiranandani Group. He said that the current change in rates brings clarity on input tax credit and other issues at the time of occupation. Chetan Shah, the Chairman.





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Gurugram Homebuyers’ wait for GST relief

The GST Council on Wednesday deferred the decision to consider a reduction in tax on Gurugram under-construction houses to Sunday. Since discussions in today’s GST Council meet remained inconsclusive as certain states wanted physical meeting for this agenda, the real estate issue would be taken by the Council on Sunday, Finance Minister Arun Jaitley said. The meeting took place via videoconference.



Arun Jaitley also said that because of the rush of filing of returns, the due date has been extended till February 22 for all states and February 28 for Jammu & Kashmir. The due date for filing summary sales return – GSTR-3B – is February 20, he informed.



GST Council was expected to reduce GST on under-construction to 5 per cent and affordable houses to 3 per cent from current 12 per cent and 8 per cent. In the other decisions coming out of the meet, the Council decided to extended the deadline to file 3B returns by 2 days.



“While the reason for postponement could be lack of consensus, it perhaps gives the Council a little more time to deliberate on the recommendations of Group of Ministers to address the real estate sector issues. From a policy standpoint, restricting the input credit is not a good idea for any sector, particularly real estate which requires more formalization,” Pratik Jain, Partner and Leader Indirect Tax, PwC India said.



Earlier last month, the GST Council notified formation of a ministerial panel to study problems in the real estate sector under the indirect tax regime and suggest remedial measures. The panel is headed by Gujarat Deputy Chief Minister Nitin Patel and also have Maharashtra Finance Minister Sudhir Mungantiwar and Karnataka.



In the last meeting, GST Council gave relief to small businesses by hiking GST exemption limit from Rs 20 lakh to Rs 40 lakh and extending the composition scheme to service providers. The new exemption threshold for businesses supplying goods to register under the GST will take effect from April 1, 2019.



Meanwhile, the finance ministers of these Opposition-ruled states had expressed concerns about the discussion on lowering tax rate on residential housing citing potential leakages and no assurance of benefits reaching end-buyers.

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DLF plans to sell ready-to-move-in flats

Realty major DLF will focus on selling ready-to-move-in flats worth Rs 15,000 crore in the next four years and launch projects for sale only after reaching advanced stage of construction.

Out of Rs 15,000-crore worth of housing units, around Rs 9,000-10,000-crore inventories are in Gurgaon.

The real estate sector, particularly housing, is facing multi-year demand slowdown, resulting in sluggish sales and unsold inventories.

In an investor presentation, the country’s largest realty firm said the company has modified its business model for residential segment.

It will “sell completed product or products which are at an advanced stage of completion instead of selling off a plan”.

The new business model will help the company in achieving higher realisation besides mitigating regulatory risks and delays beyond its control, DLF said.

“Empirically, it has been observed that the price of the finished/completed product is valued significantly higher than what it is priced at the time of the launch,” the presentation said.

In the revised model, DLF said the increase in working capital costs would be marginal as construction finance is available at attractive rates, currently at about 9.25%.

“The company will focus on selling the completed inventory valued at about Rs 15,000 crore (net of pending construction payments) on its books over the next 3-4 years,” the presentation said.

DLF said the company would start development of projects to create completed inventories, which would be open for sales in pace with the demand for its current completed stocks.

The realty firm has initiated the process to start construction of its housing project at Moti Nagar in central Delhi.

This project, with a total saleable are of about 7 million sq ft, is in joint venture with GIC, the Singapore’s sovereign wealth fund.

GIC had invested nearly Rs 2,000 crore to acquire about 50% stake in this project.

In commercial segment, DLF has already formed a JV with GIC. In the joint venture firm DLF Cyber City Developers Ltd (DCCDL), DLF has 66.66% stake while GIC has the rest 33.34% shareholding.

GIC acquired stake in DCCDL from DLF promoters for nearly Rs 9,000 crore. DCCDL holds bulk of rent yielding commercial assets of DLF group.

DLF promoters have already infused Rs 9,000 crore in the company and plans to pump in Rs 2,500 more.

This has helped DLF in reducing debt substantially. At present, DLF’s debt stands at about Rs 5,500 crore, while the net debt of JV firm DCCDL is around Rs 16,000 crore.

It’s overall net debt stood at nearly Rs 27,000 crore as on September 30, 2017.

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बजट 2019 की 10 बड़ी बातें

अंतरिम बजट की दस बड़ी बातें

सरकार ने टैक्स फ्री इनकम के स्लैब को 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है. यानी कि अब 5 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं भरना होगा.
यानी स्टैंडर्ड निवेश करने पर 6.5 लाख रुपये की इनकम वालों को नहीं देना होगा टैक्स
डिफेंस बजट को बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा करने का ऐलान
'पीएम किसान सम्मान निधि' योजना जिसमें 2 हेक्टेयर तक की जमीन रखने वाले किसानों के खातों में सीधे सालाना 6 हजार रुपये भेजे जाएंगे.
आपदा पीड़ित किसानों को ब्याज दर में 5 फीसदी की छूट मिलेगी. समय पर कर्ज चुकाने पर 3 परसेंट अतिरिक्त छूट मिलेगी.
सरकार गौ पालन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग बनाएगी.
मछुआरों को ब्याज में 2 फीसदी की छूट मिलेगी. इसके अलावा समय से लोन चुकाने वाले मछुआरों को ब्याज में अतिरिक्त छूट भी मिलेगी.
'प्रधानमंत्री योगदान श्रम योगी मानधन' योजना की घोषणा की, जिसके तहत असंगठिक क्षेत्र के मजदूरों को 3,000 रुपये प्रतिमाह की निश्चित पेंशन दी जाएगी
पीयूष गोयल ने बताया कि देश में देश में अब कोई भी बिना गेट वाली रेलवे क्रॉसिंग नहीं है.
घर खरीदने वालों पर GST कम करने की कोशिश करेगी सरकार

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मोदी सरकार का 'सिक्सर'

पांच लाख रुपए कमाने पर जो आप 13 हजार रुपए टैक्स देते थे, वो अब जीरो (0) हो गया है.

नई दिल्लीः आम टैक्स पेयर्स या यूं कहें कम कमाने वाले लोग जो टैक्स के बोझ से दबे थे, उन्हें इतिहास में पहली बार सबसे बड़ी टैक्स छूट दी गई है. यूं तो सरकार ने पांच लाख रुपए तक की आमदनी को टैक्स फ्री कर दिया है, लेकिन अगर आप LIC, मेडिकल, पीएफ में निवेश करते हैं, तो आपको पूरे-पूरे 6.50 लाख रुपए तक कोई भी टैक्स नहीं लगेगा. आसान भाषा में कहें तो पहले पांच लाख रुपए कमाने पर जो आप 13 हजार रुपए टैक्स देते थे, वो अब जीरो (0) हो गया है.

ऐसे समझें आपकी बचत

आय पहले टैक्स अब टैक्स
5 लाख 13,000 पूरी छूट
7.5 लाख 65,000 49,920
10 लाख 1.17 लाख 99,840
20 लाख 4.29 लाख 4.02 लाख
मोदी सरकार का 'सिक्सर'

- मकान के किराए पर लगने वाले टैक्स डिडक्शन की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर 2.5 कर दी गई है

- 40 हजार तक के ब्याज पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.
- स्टैंडर्ड डिडक्शन 40 हजार से बढ़ाकर 50 हजार किया गया.

- तीन करोड़ से ज्यादा मध्यमवर्गीय लोगों को लाभ मिलेगा

- अगर इनवेस्टमेंट करते हैं तो, साढ़े 6 लाख तक कोई टैक्स नहीं लगेगा

टैक्स रिटर्न भरना होगा आसान

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इनकम टैक्स से जुड़ी सभी समस्याओं का ऑनलाइन समाधान हो रहा है. 99.54 फीसदी इनकम टैक्स रिटर्न्स को बिना किसी छानबीन के मंजूर किया गया है. अब 24 घंटे में सभी इनकम टैक्स रिटर्न प्रोसेस होंगे और तुरंत रिफंड दिए जाएंगे. अगले दो साल में आईटीआर का वेरिफिकेशन तुरंत ऑनलाइन होगा. इसमें किसी टैक्स अफसर की भूमिका नहीं होगी. आगे चलकर स्क्रूटनी के लिए भी दफ्तर नहीं जाना होगा. टैक्स अफसर कौन है और टैक्स देने वाला कौन है, यह दोनों को पता नहीं चल पाएगा.

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घर खरीदने के लिए 20 हजार से ऊपर का नकद लेन-देन पड़ेगा भारी, देना पड़ेगा जुर्माना

अगर आपने घर खरीदने के लिए पैसा कैश में दिया है, तो फिर भारी जुर्माना देने के लिए तैयार हो जाइये। आयकर विभाग जल्द ही दिल्ली क्षेत्र में ऐसे लोगों की लिस्ट तैयार करने जा रही है, जिन्होंने 1 जून 2015 से दिसंबर 2018 के बीच नगद लेनदेन के जरिए प्रॉपर्टी को खरीदा है।

बनाई सूची

आयकर विभाग ने दिल्ली में स्थित सभी 21 उप रजिस्ट्रार कार्यालयों से ऐसे लोगों की जानकारी मांगी थीं, जिन्होंने रोक के बावजूद नगद में प्रॉपर्टी को खरीदा था। विभाग ने अब ऐसे लोगों की सूची को तैयार कर लिया है। इनको नोटिस भेजकर जुर्माना भरने के लिए कहा जाएगा।

यह नियम हुआ था लागू

इनकम टैक्स विभाग ने आयकरदाताओं के लिए 2015 में एक फरमान जारी किया था। इस फरमान के अनुसार प्रॉपर्टी खरीदने या बेचने में 20 हजार रुपये से ज्यादा कैश लेना या देना भारी पड़ सकता है। आयकर विभाग ने एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसके तहत निर्धारित सीमा से ज्यादा कैश का लेन-देन करने वालों पर नजर रखी जा रही है।

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